।। राम ।।
आरती कीजै अवधेश लला की । ज्ञान और विज्ञान कला की ।।टेक।।
धनुष
वान कर कंज बिराजै । कटि तूणीर मुकुटमणि छाजै।।
सुर नर मुनि देखत छवि मोहैं । वाम भाग बैदेही सोहैं।।
शिव
अज नारद सकल मुनीसा । गावत गुन जय जय जगदीसा।।
दीनन
भीर बड़ी दरबारा ।
जिनको ठौर नहीं संसारा।।
भालू
भील गीध जन नाना । कपि केवट निसचर को माना।।
दीनन
को रघुवीर बसाये । निज कहि प्रभु सादर अपनाये।।
कौशिक मुनि के काज सँवारे । दीन अहिल्या को प्रभु तारे ।।
जनक
सोच पल में प्रभु टारे । भंजेउ धनुष भूप सब हारे।।
देखि
प्रभाव परशुधर हारे । गुन गन कहि तप हेतु सिधारे।।
सीता
व्याहि अवधपुर
आये । अनुपम चरित लोग सब गाये।।
पिता
वचन हित वन पगु धारे । हिल मिल प्रभु दीनन निस्तारे।।
दीन
सुग्रीव किये कपिराई । राम सखा कपि भालु कहाई ।।
रावण
को निज धाम पठाये । भक्त विभीषन लंका पाये।।
अवध
धाम प्रभु आइ बिराजे । सिंहासन सीता संग राजे।।
भरत लखन अरु रिपुहन भाई । हनुमदादि सेवहिं मन लाई।।
राजा
राम सुयश जग छाये । वेद पुरान साधु सुर गाये।।
दीनन
के प्रभु राम गोहारी । करुणा छमा दया गुन भारी।।
राम
आरती आरति हारी । मुदित करहिं सुर नर मुनि नारी।।
दीन संतोष आरती गावै । चरण कमल अविरल रति पावै।।
।। जय श्रीराम।।
नोट: इस ब्लॉग पर मार्च २०१५ में प्रकाशित और मेरे द्वार रचित रामजी की आरती- “आरती कीजै श्रीराम लला की । पूण निपुण धनुवेद कला की” को बिना कोई संदर्भ दिए अनेकों लोगों ने अपने ब्लॉग / वेब पेज पर प्रकाशित कर लिया है । जिसमें देश के कई प्रमुख समाचार पत्र और टीवी चैनेल भी शामिल हैं । और तो और संस्कार टीवी ने गीत/Lyrics अर्थात आरती को पारंपरिक (Traditional) बताकर अपने गायकों से आरती को गवाकर अपने यूट्यूब, फेसबुक और ऑफिसियल ऐप आदि पर विडियों को प्रसारित भी कर दिया है । कृपया ऐसा करने से बचें ।
।। जय श्रीराम।।
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