विनयपत्रिका जी की रचना गोस्वामी तुलसीदासजी महाराज ने जन-जन को रामजी से जोड़ने के लिए किया था । जन कल्याण के लिए किया था । अधिक से अधिक लोग विनयपत्रिका जी से जुड़कर रामजी से जुड़ें और अपना कल्याण कर सके इस उद्देश से पिछले पोस्ट में विनयपत्रिका जी के नवाह्नपारायण को बताया गया था ।
यदि किसी के पास नवाह्नपारायण करने का समय नहीं है तो वह मासपारायण कर सकता है । मास पारायण करने में सबसे कम समय लगता है । इसलिए हर कोई विनयपत्रिका जी का मासपारायण आसानी से कर सकता है ।
विनयपत्रिका जी का मासपारायण करके लोग कल्याण के भागी बनें । इस उद्देश्य से मासपारायण करने के बारे में बताया जा रहा है । आसा है लोग इसका लाभ उठाएगें ।
विनयपत्रिका जी का मासपारायण करने के लिए पहले २१ दिनों तक रोज नौ पदों का
पाठ किया जाता है । और बाद के नौ दिनों में रोज दस पदों का पाठ किया जाता है । इस
तरह तीस दिन में अर्थात एक मास में संपूर्ण पाठ हो जाता है । इसे ही मासपारायण कहा
जाता है ।
जो लोग नवाह्नपारायण नहीं कर सकते उन्हें
मासपारायण अवश्य करना चाहिए और कल्याणभागी बनना चाहिए ।
कुछ विद्वान
लोग कह सकते हैं कि नवाह्नपारायण और मासपारायण प्रबंधकाव्य के लिए ही परंपरा से
अनुमोदित है । लेकिन विनयपत्रिका जी का नवाह्नपारायण अथवा मासपारायण करना और इस
माध्यम से विनयपत्रिका जी से जुड़ना अनुचित भी नहीं है ।
कुल मिलकर मूल बात जुड़ने की है । जैसे कोई कहे कि
मैं रोजा पाँच पद अथवा रोज दस या ग्यारह पद का पाठ करता हूँ । तो यह भी अच्छी बता
है । बस जुड़ना है । अतः विनयपत्रिका जी से नवाह्नपारायण अथवा मासपारायण के माध्यम
से जुड़कर भी कल्याण कर सकते हैं ।
।। जय श्रीराम ।।
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