इस आरती को कुछ लोग बहुत प्राचीन और ऐतिहासिक बता
रहे हैं । कुछ लोगों का कहना है कि यह एक पारंपरिक आरती है । जो सदियों से
चली आ रही है । और इसके रचनाकार के बारे में कोई जानकारी नहीं है । रचनाकर अज्ञात
है । एक ने तो अपने वेबसाइट पर यहाँ तक लिखा कि सम्भवतः समय समय पर विभिन्न साधु
संतो ने इसमें संशोधन भी किया है ।
जबकि ये सब बातें निराधार हैं । लोगों को गुमराह करने का प्रयास है । और किसी सामग्री को बिना कोई क्रेडिट दिए प्रकाशित कर लेने का एक तरीका है । जो हर तरह से अनुचित है । इस आरती में आज तक कोई संशोधन नहीं किया गया है । यह जिस रूप में लिखी गई थी ठीक वैसे ही प्रचारित और प्रसारित है तथा वैसे ही विभिन्न गायको द्वारा गाई गई है और गाई जा रही है ।
पारंपरिक
और रचनाकार के अज्ञात होने के दावे से तथा ऐसा लिखने से कि यह आरती सदियों से चली
आ रही है कई लोगों ने अपने वेबसाइट, फेसबुक आदि पर तथा देश के अधिकाँश प्रमुख
समाचार और टीवी चैनेलों ने बिना कोई संदर्भ दिए अथवा रचनाकार का नाम दिए बिना इसे
प्रकाशित कर लिया । और यह सोशल मीडिया के अन्य कई प्लेटफार्म पर प्रचारित और प्रसारित
हुई ।
कुछ बड़ी कम्पनियाँ जो डेकोरेशन आइटम के साथ-साथ कई चीजों का निर्माण और विक्रय करती हैं वे रेनबो रोज गोल्ड क्रिस्टल आरती वा पोस्टर आदि के फॉर्मेट में रामलला की फोटो के साथ इस आरती का भी विक्रय करने लगीं और कर रही हैं ।
कई लोगों ने अपने यूट्यूब चैनेल पर वीडियो बनाकर
अपलोड कर लिया और आरती/Lyrics को पारंपरिक लिख दिया । और तो और संस्कार टीवी ने भी
गीत/Lyrics को परंपरागत बताकर अपने गायकों से आरती को गवाकर अपने यूट्यूब, फेसबुक
और ऑफिसियल ऐप आदि पर विडियों को प्रसारित
कर दिया ।
यह आरती केवल पंद्रह-सोलह वर्ष पुरानी है । इसकी रचना मैंने
२०१०-२०११ में प्रयागराज के झूँसी में किया था । श्रीराम चालीसा के साथ –साथ इस
आरती की भी रचना हुई थी ।
श्रीराम चालीसा के साथ ही इस आरती को मार्च २०१५
में इस ब्लॉग पर प्रकाशित कर दिया था । २०१५ में प्रकाशित श्रीराम चालीसा के साथ
इस आरती का लिंक निम्नवत है-
http://sriramprabhukripa.blogspot.com/2015/03/blog-post_7.html
लेखन और प्रकाशन का मुख्य उद्देश्य यही है कि
अधिक से अधिक लोग पढ़े और रामजी से जुड़े । लेकिन प्रकाशित किसी सामग्री को लेकर उसे
हर जगह बिना कोई संदर्भ दिए पोस्ट कर देना और रचना को प्राचीन और ऐतिहासिक तथा
रचनाकार को अज्ञात बता देना हर तरह से गलत और गुमराह करने वाला है । ऐसा बिल्कुल
नहीं करना चाहिए ।
।। जय श्रीराम ।।
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