।। राम ।।
आरती कीजे वसुदेव लला की । ज्ञान और विज्ञान कला की
।। टेक।।
कर में सुंदर मुरली राजे । कोटि मदन देखत छवि
लाजे ।।
कंसासुर बहु असुर पठाये । धाम दिए दुर्लभ गति
पाये ।।
माखनचोर बने करि लीला । वृदावन किए चरित रसीला ।।
नन्द तनय जसुमति के लाला । प्रीति पुनीत किए ब्रजबाला ।।
बालसखा सँग गाय चराये । नाग कालिया दूर पठाये ।।
गिरि गोवर्धन लिए उठाई । देवराज अज रहे लजाई ।।
वसुदेव देवकी वंदि छुड़ाए । उग्रसेन को राज दिलाए ।।
बसे जाय प्रभु सिंधु मझारी । हलधर भ्रात सुदर्शन
धारी ।।
द्रुपद सुता की चीर बढ़ाये । जब जब भीर पड़ी प्रभु
आये ।।
नाना व्याह किए यदुराई । त्रेता की कछु रही बकाई ।।
जो रघुवीर सोई यदुबीरा । भेद मूढ़ मन नहिं मतिधीरा ।।
जामवंत अरु कपि हनुमाना। मिले किए बहु चरित सुजाना ।।
भारत में पारथ उपदेशे । गीता ज्ञान विशेष विशेषे ।।
पांडव कै बहु बिधि हित कीन्हा । दीन सुदामा की
सुधि लीन्हा ।।
मीरा सूर दीन बहु तारे । तिहुँपुर होत कृष्न जयकारे ।।
धूप दीप नैवेद चढ़ावै । राधावर यदुवर को ध्यावै ।।
दीन संतोष आरती गावै । कृष्ण कृपा अभिमत फल पावै
।।
।। श्रीकृष्णचंद्र भगवान की जय ।।
नोट: इस ब्लॉग पर मार्च २०१५ में प्रकाशित और मेरे द्वार रचित रामजी की आरती- “आरती कीजै श्रीराम लला की । पूण निपुण धनुवेद कला की” को बिना कोई संदर्भ दिए अनेकों लोगों ने अपने ब्लॉग / वेब पेज पर प्रकाशित कर लिया है । जिसमें देश के कई प्रमुख समाचार पत्र और टीवी चैनेल भी शामिल हैं । और तो और संस्कार टीवी ने गीत/Lyrics अर्थात आरती को पारंपरिक (Traditional) बताकर अपने गायकों से आरती को गवाकर अपने यूट्यूब, फेसबुक और ऑफिसियल वेबसाइट आदि पर विडियों को प्रसारित भी कर दिया है । कुछ लोगों ने अपनी-अपनी वेबसाइट पर आरती को पारंपरिक और रचनाकार को अज्ञात लिख रखा है । जो कि हर तरह से गलत है ।
।। जय श्रीराम।।